लौका जे लौकै रामू बिजली जे छिटकय
lauka je laukai ramu bijli je chhitkay
लौका जे लौकै रामू बिजली जे छिटकय
बिजुबन कुहुकै मयूर
सबके बलमवा रामू घर-घर बिराजै
हमरो बालम परदेश
कहाँ से लैबै रामा कर रे कागजवा
कहाँ से लेब मसिहान
घर पछुअरबामे कैथा रे भैया
झट दए चिट्ठी लिखि देहो
चारू काते लिखियै इनिति मिनितिया
बीचे ठामे धनि के विरोग
घर पछुअरबामे हजमा रे भैया
झट दीहो चिट्ठी पहुँचाय
तोहरो बालम जी के चिन्हियौ ने जानियौ
ककरा के देब हम पत्र
हमरो बालम जी के नामे-नामे केसिया
आम कोसा सन आँखि
एकहि मुट्ठी केर डाँड़ हुनकर छै
डारिम बिया सन दाँत
वैह जे आरे हजमा हमरो बालम
हुनके के दीहै तोंहैं पत्र
जाहि ठाम देखिहै हजमा ससुर भैसुर लोक
चिठिया के लिहै नुकाय
जाहि ठाम देखिहै हजमा असकर बालमजी
चिठिया के दीहै खसाय
चिठिया जे पढ़ै बालम मने मुसुकावै
नैना से झहरै नीर
लेहो लेहो आहे राजा अपन नौकरिया
हमे जाइ छी धनि के उदेस
- पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 336)
- संपादक : अणिमा सिंह
- प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
- संस्करण : 1993
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