हारे वाला ऊँची-नीची सरवर पाल( दामाद-गीत)
hare vala uunchi nichi sarvar paal( damad geet)
हारे वाला ऊँची-नीची सरवर पाल
जमई धावे धोपती जी म्हारा राज
हारे वाला कोनस राम रा गज भीम
कोणजी घर पावणा जी म्हारा राज
हां वो दासी ताता-सा पाणी समोव
जमई न्हावे न्हावणा जी म्हारा राज
हां वो बाई ताता सा भोजन परोस
जमई जीने जीमणा जी म्हारा राज
हां वो दासी ठंडी सी झारी भरलाव
जमई पीवे पीवणी जी म्हारा राज
हां वो दासी पाना रा विड़ला लगाव
जमई बीड़ा चावसी जी म्हारा राज
हां वो दासी मेलां में दिवलो संजोव
जमई चौपड़ खेलरन्यां जी म्हारा राज
हां वो दासी तेलां री खबर मंगाव
न्योण हारिया ने कोण जीत्याजी म्हारा राज
हां वो वाई हरिया साता-पाचां री
रामां री बाई जीत्याजी म्हारा राज
हां रे वाला आई जमायां ने रीस
वाई ने ताज्या ताजणा जी म्हारा राज
हां रे वाला आई जमाई जी ने रीस
भेलां से नीचे ऊतरियाजी म्हारा राज
हां रे वाला दई-दई दादाजी री आन
वाई ने पाछा फेरिया जी म्हारा राज
हां रे वाला दई-दई वीराजी री आन
वाई ने पाछा फेरियाजी म्हारा राज
ऊँची नीची सरोवर की पाल
जमाई धोएं धोती जी मेरे राज
कौन से राम के ये गज भीम
किस घर के पाहुने हैं मेरे राज
हाँ दासी गर्भ पानी रख
जमाई नहायेंगे मेरे राज
हाँ बेटी गरम भोजन परोस
जमाई जी जीमेंगे भोजन मेरे राज
हाँ दासी ठंडा पानी भर ला
जमई जी पीयेंगे पानी मेरे राज
हाँ दासी महल में दीया लगा
जमाई चौपड़ खेलेंगे मेरे राज
हाँ दासी महल की खबर मँगा
कौन हारा, कौन जीता मेरे राज
हाँ वो बाई हारे सात-पाँच में भीम
राम की बाई जीती मेरे राज
आई जमाई को रीस (क्रोध)
बाई वे चलाएं चाबुक मेरे राज
आई जमाई जी को रीस
महल से नीचे उतरे मेरे राज
दे कर दादाजी पिताजी की आन
बाई को वापस भेजो मेरे राज
दे कर वीराजी की आन
बाई को वापस भेजो मेरे राज
- पुस्तक : मालवा के लोक गीत (पृष्ठ 18)
- संपादक : कपिल तिवारी, नवल शुक्ल
- रचनाकार : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित।
- प्रकाशन : मध्यदेश आदिवासी लोक कला परिषद्
- संस्करण : 1995
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