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चढ़ैत चैत चित चंचल हमरो

chaDhait chait chit chanchal hamro

अज्ञात

अज्ञात

चढ़ैत चैत चित चंचल हमरो

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    (बारहमासा)

    चढ़ैत चैत चित चंचल हमरो

    सखि बैसाख बीति गेल सगरो

    जेठ पिया नहि आयल राती

    लिखब हम पाँती हो

    असाढ़ चौगिर्द घेरि लेल बदरा

    साबन सिन्दूर सोभित कजरा

    भादव रैन अन्हारि

    काटब कोना राति हो

    आसिन सरद चाँदनी छापी

    कातिक बिन पिया बड़ दुःखदायी

    अगहन कल बिरहकेर माती हो

    पूस मास बड़ सीत सतावै

    माघ बिना पिय जान जावै

    फागुन पिया संगमे प्रीतम धूम मचावै

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 360)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

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