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ब्रजमे होरि मचाइ

brajme hori machai

अज्ञात

अज्ञात

ब्रजमे होरि मचाइ

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    ब्रजमे होरि मचाइ घर-घर बाजु बधाइ

    एतयसँ निकलली सुन्दरि राधिका

    ओतयसँ कुमर कन्हाइ

    ब्रजमे होरि मचाइ

    खेलथि फागु परस्पर हिलिमिलि सुख कहलो जाइ

    बाजय ताल मृदंग झाँझ डफ मुरली हो सहनाइ

    ब्रजमे होरि मचाइ

    अबीर गुलाब केसरि कुमकुम रहत सकल ब्रज छाइ

    लपकि-झपकि हुनि श्याम सुन्दर के परवश पकड़ि मंगाइ

    ब्रजमे होरि मचाइ

    लालजी के नाच नचाइ मेघो मेघ बाज बोलाइ

    ब्रजमे होरि मचाइ

    छीनि लेल मुख मुरली पीताम्बर सिरसँ चुनरी ओढ़ाइ

    ब्रजमे होरि मचाइ

    बेली माल नैन बिच काजर नक बेसरि पहिराइ

    नवो नव नारि बनाओल

    ब्रजमे होरि मचाइ

    बिहुँसि बोलथि श्यामसुन्दर जी कहाँ गेल चतुराइ

    कहाँ गेला तोर नन्द पिता जी कतय यशोदा माइ

    लाल जी के लियऽ ने छोड़ाइ

    ब्रज़मे होरि मचाइ

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 340)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

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