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सुवारिया री बेटी भेरूजी थारी (भैरव-गीत)

bheru (bhairav) ka geet

अज्ञात

अज्ञात

सुवारिया री बेटी भेरूजी थारी (भैरव-गीत)

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    सुवारिया री बेटी भेरूजी थारी सेवा अई रे

    थारी सेवा अई, ने बाजुट लाई रे

    काका मतवाला थें म्हारी नींद गमाई रे

    नींद गमाई, सारी रैन जगाई रे

    चावुकड़े चमकाई रे

    कंठालियारी बेटी भेरूजी थारी सेवा आई रे

    थारी सेवा आई, नारेक लाई रे

    तेली री बेटी भेरूजी, थारी सेवा आई रे

    थारी सेवा आई, तेल-सिन्दूर लाई रे

    माली की बेटी भेरूजी, थारी सेवा आई रे

    थारी सेवा आई, फुलड़ा लाई रे

    तमोली की बेटी भेरूजी थारी सेवा आई रे

    थारी सेवा जाई, बिड़ला लाई रे

    हलवाई री बेटी भेरूजी, थारी सेवा आई रे

    थारी सेवा आई, सिरनी लाई रे

    सेपकरी बेटी भेरूजी थारी सेवा लाई रे

    थारी सेवा आई, गुड़-गोकर लाई रे

    काक मतवाला थें म्हारी नींद गमाई रे

    नींद गमाई, सारी रैन जगाई

    चावुकड़े चमकाई रे ।

    बढ़ई की बेटी भेरूजी, तेरी सेवा में आई

    तेरी सेवा में आई, बाजुट लाई है

    काले मतवाले तूने मेरी नींद गुमाई है

    नींद गुमाई, सारी रैन जगाई है

    चाबुक के चमकाई है

    पंसारी की बेटी भूरूजी तेरी सेवा में आई है

    तेरी सेवा में आई नारियल लाई है

    तेली की वेटी भरूजी तेरी सेवा मे आई है

    सेवा में आई, तेल-सिन्दूर लाई है

    माली की बेटी भेरूजी तेरी सेवा में आई है

    सेवा में आई, फूल माला लाई है

    तम्बोली की बेटी भेरूजी तेरी सेवा में आई है

    सेवा में आई, पान के बीड़े लाई है

    हलवाई की बेटी भेरूजी तेरी सेवा में आई है

    सेवा में आई, मिठाई-मेवा लाई है

    सेवक की बेटी भेरूजी, तेरी सेवा में आई है

    सेवा मे आई, गुड़-गंकरिया लाई है

    काले मतवाले तूने मेरी नींद गुमाई है

    नींद गुमाई, सारी रैन जगाई है

    चाबुक से चमकाई है।

    स्रोत :
    • पुस्तक : मालवा के लोक गीत (पृष्ठ 7)
    • संपादक : कपिल तिवारी, नवल शुक्ल
    • रचनाकार : हिन्दवी के लिए अनुवादक द्वारा चयनित।
    • प्रकाशन : मध्यदेश आदिवासी लोक कला परिषद्
    • संस्करण : 1995

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