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असाढ़ हे सखि प्रेम लागत बुन्द झहरत मेघ हे

asaDh he sakhi prem lagat bund jhahrat megh he

अज्ञात

अज्ञात

असाढ़ हे सखि प्रेम लागत बुन्द झहरत मेघ हे

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    (चौमासा)

    असाढ़ हे सखि प्रेम लागत बुन्द झहरत मेघ हे

    घूमल काम जगाय चहुँ दिशि बुझत नहि दुख मोर हे

    सावोन सब करि आस निग्रह विविध कैल प्रयत्न हे

    शब्द उत्कट करथि नभमे क्रोध देल जगाय हे

    भादव नहि छल आस मनमे काम करत सनेह हे

    उषम ज्वाला उठति तनमे देखल राति अन्हार हे

    आसिनमे सब आस कयलहुँ कृष्ण रहता सहाय हे

    देखि मनमे लोभ उपजल भाँग की जगदीश हे

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 357)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

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