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अहाँ रहि जइयौ जनक नगरियामे

ahan rahi jaiyau janak nagariyame

अज्ञात

अज्ञात

अहाँ रहि जइयौ जनक नगरियामे

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    (बारहमासा)

    अहाँ रहू ससुरारि कहाँ जैबै यौ सरकार

    अहाँ रहि जइयौ जनक नगरियामे

    आयल पूसहि मास जिया अतिसय हुलास

    मनमा भूलि गेलै सामली सुरतियामे

    माघ शिशिर सोहाय लेबऽ प्रेममे लोभाय

    प्यारी जाड़ो ने लागत कोठरियामे

    फागुन फगुआ मनाय रंग घोरि के मंगाय

    प्यारे तोहरो के देबऽ चदरियामे

    चैत आयल शृङ्गार फूल फुलये गुलाब

    मनमा भूलि गेलै आम के चटनियामे

    बैसाख मास रौद सहलो जाय

    प्यारे बुलहु देबऽ डगरियामे

    जेठ रात बीतै संग घाम सहलो जाय

    मनमा भूलि गेलै श्यामली सुरतियामे

    अषाढ़ ही मास बुन्द झहरय बसात

    प्यारे गाना सुनैबऽ कोठरियामे

    सावन मास करू झुलनी तैयार

    प्यारे तोहरो झुलैबऽ झुलनियामे

    भादव मास सब फुलबऽ फुलाय

    प्यारे झूलि लियह लाली फुलबरियामे

    आसिन आयल बहार सखि सब करय श्रृंगार

    आसा पूरि जैतो ससुरियामे

    कातिक मास भरदुतिया मनाबऽ

    प्यारे मधुर खुयैबौ कोठरियामे

    अगहन उत्सव मनाबऽ पाति लिखि कए भेजाबऽ

    प्यारे सुख करि लेहो ससुररियामे

    अहाँ रहू ससुरारि कहाँ जैबै यौ सरकार

    अहाँ रहि जइयौ जनक नगरियामे

    स्रोत :
    • पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 359)
    • संपादक : अणिमा सिंह
    • प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
    • संस्करण : 1993

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