आदि वरषा फिरत चहुँदिसि
aadi varsha phirat chahundisi
(चौमासा)
आदि वरषा फिरत चहुँदिसि आयल मास असाढ़ यो
श्याम सुन्दर घर नहि आयल प्रेम हमर अभाग यो
सावन हे सखि सर्व सोहावन पिया गमन बड़ दूर यो
कौन धनि से रीझल पिया छोड़ि देल हमर सिनेह यो
भादव के अनुरागी बरषा चहुँ दिसि गरजत मेघ यो
आसिन हे सखि आस लगाओल आसो न पुरल हमार यो
पिया परदेस सखि ओतहि गमाओल हम धनि बारि वयस यो
- पुस्तक : मैथिली लोकगीत (पृष्ठ 355)
- संपादक : अणिमा सिंह
- प्रकाशन : साहित्य अकादमी, नई दिल्ली
- संस्करण : 1993
Additional information available
Click on the INTERESTING button to view additional information associated with this sher.
About this sher
rare Unpublished content
This ghazal contains ashaar not published in the public domain. These are marked by a red line on the left.