'टूटा पानी...छूटा पानी' प्रस्तुत पुस्तक में रचनाकार ने यौवन की गतिविधियाँ जो तटबंध टूटने सदृश हैं। जीवन का यर्थाथ दो जिस्म का रिसाव है, मिलन है, चाहें स्त्री पुरूष के रिश्तें हों या स्व के रिश्ते इन सबकों ही रचनाकार ने एक स्वरूप में लिखा है।
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