जबसें बिछरे बलम कनइया

jabse.n bichhre balam kan.iya

चंद्रसखी

चंद्रसखी

जबसें बिछरे बलम कनइया

चंद्रसखी

और अधिकचंद्रसखी

    जबसें बिछरे बलम कनइया, ननद तुमारे भइया।

    ना टैरौ कोऊ दाव जू कै-कै, ना कयौ स्याम कनइया।

    ना बे चरैं पियैं ना पानी, तलफैं घरै लबइया।

    चंद्रसखी राधा की उन बिन, कैसें कटै उमरिया॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : बुंदेलखंड की फागें (पृष्ठ 95)
    • संपादक : अयोध्या प्रसाद गुप्त 'कुमुद'
    • रचनाकार : चंद्रसखी
    • प्रकाशन : उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी
    • संस्करण : 2000

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