उत्तर प्रदेश के रचनाकार

कुल: 347

नई पीढ़ी के लेखक और दास्तानगो।

भक्ति-काव्य की कृष्णभक्त शाखा के माधुर्योपासक कवि। 'राधावल्लभ संप्रदाय' के प्रवर्तक।

‘मधुशाला’ के लिए मशहूर समादृत कवि-लेखक और अनुवादक। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

समादृत समालोचक, निबंधकार, उपन्यासकार और साहित्य-इतिहासकार। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

विवेक और विचार से संपन्न हिंदी के दुर्लभ कवि-गद्यकार।

रीतिकाल के आचार्य कवियों में से एक। भरतपुर नरेश प्रतापसिंह के आश्रित। भावुक, सहृदय और विषय को स्पष्ट करने में कुशल कवि।

सुचर्चित गीतकार।

सुपरिचित कवयित्री और कहानीकार।

सुपरिचित कवि-लेखक। दलित-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

द्विवेदीयुगीन कवि। हिंदी की गांधीवादी राष्ट्रीय धारा के प्रतिनिधि कवि के रूप में समादृत।

‘कर्मनाशा’ कविता-संग्रह के कवि। बतौर अनुवादक भी उल्लेखनीय।

नई पीढ़ी के कवि और अनुवादक।

चरनदास की शिष्या। प्रगाढ़ गुरुभक्ति, संसार से पूर्ण वैराग्य, नाम जप और सगुण-निर्गुण ब्रह्म में अभेद भाव-पदों की मुख्य विषय-वस्तु।

कृष्णोपासक कवि। चतुष् ध्रुपद-शैली के रचयिता और तानसेन के संगीत गुरु। सखी संप्रदाय के प्रवर्तक।

नवें दशक के प्रमुख कवि। भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

सेवक

1815 - 1881

रीतिकालीन अलक्षित कवि।

परंपरागत आदर्श पर विशेष बल देने वाली भारतेंदु युग की कवयित्री।

आधुनिक हिंदी कविता के प्रमुख कवि और नाटककार। अपनी पत्रकारिता के लिए भी प्रसिद्ध। साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित।

नई पीढ़ी की लेखिका और पत्रकार।

छायावादी दौर के चार स्तंभों में से एक। समादृत कवि-कथाकार। महाप्राण नाम से विख्यात।

हिंदी-अँग्रेज़ी दोनों में लिखने वाले सुपरिचित कवि, अनुवादक, संपादक और प्रकाशक।

प्राचीन काव्य के ख्यातिप्राप्त टीकाकार और अलक्षित कवि।

रीतिकालीन कवि, टीकाकार और गद्यकार।

छायावाद के आधार स्तंभों में से एक। 'प्रकृति के सुकुमार' कवि। ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित।

सुपरिचित कवयित्री और आलोचक। 'चौथा सप्तक’ में शामिल।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक। ‘सूफ़ीनामा’ से संबद्ध।

सुपरिचित कवि-लेखक और संपादक। पत्रकारिता से संबद्ध।

सुप्रसिद्ध कवयित्री। 'झाँसी की रानी' कविता के लिए स्मरणीय।

नई पीढ़ी की सशक्त कवयित्री।

भक्तिकाल और रीतिकाल के संधि कवि। ऋतुवर्णन और ललित पदविन्यास के लिए प्रसिद्ध। शृंगार के अतिरिक्त भक्तिप्रेरित उद्गारों के लिए भी स्मरणीय।

हिंदी की समादृत कवयित्री। प्रसिद्ध साहित्यकार अजित कुमार की जीवन-संगिनी।

रामानंद के बारह शिष्यों में से एक। जाति-प्रथा के विरोधी। सैन समुदाय के आराध्य।

मूलतः गणितज्ञ और ज्योतिषाचार्य। हिंदी भाषा और नागरी लिपि के प्रबल पक्षधर। 'नागरी प्रचारिणी सभा' के सभापति भी रहे।

नई पीढ़ी के कवि।

सुपरिचित कवि-आलोचक। ‘साखी’ पत्रिका के संपादक।

भरतपुर नरेश सुजानसिंह के आश्रित कवि। काव्य में वर्णन-विस्तार और शब्दनाद के लिए स्मरणीय।

सुपरिचित कवि। ‘अनहद’ के संपादक और जनवादी लेखक संघ से संबद्ध।

नई पीढ़ी के हिंदी कवि-ग़ज़लकार। लोक-संवेदना और सरोकारों के लिए उल्लेखनीय।

भारतेंदु युग के कवि। ब्रजभाषा काव्य-परंपरा के अंतिम कवियों में से एक।

शिवनारायणी संप्रदाय के प्रवर्तक। वाणियों में स्वावलंबन और स्वानुभूति पर विशेष ज़ोर। भोजपुरी भाषा का सरस प्रयोग।

'राधास्वामी सत्संग' के प्रवर्तक। सरस और हृदयग्राह्य वाणियों के लिए प्रसिद्ध।

रीतिकाल के निर्गुण संतकवि। संत बुल्ला के शिष्य और 'सतनामी संप्रदाय' के संस्थापक।

रीतिकालीन निर्गुण संतकवि और संत बुल्ला साहब के प्रधान शिष्य। वाणियों की मुख्य विषय-वस्तु अध्यात्म, प्रेम और शांति की कामना।

नई पीढ़ी के लेखक और यायावर।

नवें दशक के महत्त्वपूर्ण कवि। अपने काव्य-वैविध्य के लिए उल्लेखनीय। भारतभूषण अग्रवाल पुरस्कार से सम्मानित।

नई पीढ़ी के कवि-लेखक।

रीतिकालीन कवि। काव्य-कला में निपुण। छंदशास्त्र के विशद निरूपण के लिए स्मरणीय।

सुपरिचित कवयित्री।