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साईं घोड़े आछतहि

saa.ii.n ghoDe aachhathi

गिरिधर कविराय

गिरिधर कविराय

साईं घोड़े आछतहि

गिरिधर कविराय

और अधिकगिरिधर कविराय

    साईं घोड़े आछतहि, गदहन आयो राज।

    कौवा लीजै हाथ में, दूरि कीजिये बाज॥

    दूरि कीजिये बाज, राज पुनि ऐसो आयो।

    सिंह कीजिये कैद, स्यार गजराज चढ़ायो॥

    कह गिरिधर कबिराय जहाँ यह बूझि बड़ाई।

    तहाँ कीजै भोर सांझ उठि चलिये सांई॥

    स्रोत :
    • पुस्तक : कुण्डलियाँ गिरिधरराय (पृष्ठ 22)
    • रचनाकार : गिरिधर कविराय
    • प्रकाशन : नवलकिशोर प्रेस
    • संस्करण : 1922

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