ठहरी नदी

प्रकाश

ठहरी नदी

प्रकाश

और अधिकप्रकाश

    ऊपर आकाश नदी-सा बहता था

    नीचे नदी आकाश-सी ठहरी थी

    ठहरी हुई नदी में दृष्टि ठहरी हुई थी

    एक प्रतीक्षा, एक विस्मय ठहरा हुआ था

    आकाश के जल में दूर से फूल-पत्ते और टहनियाँ बहती आती थीं

    एक जलता हुआ दीया और समय बहता आता था

    बहते हुए आकाश में प्रकाश भी निश्चिंत बहता था

    अचानक जल का रेला आता था

    आकाश को बहा ले जाता था

    आकाश के अनुपस्थित होते ही

    नीचे विस्मय में ठहरी नदी फिर बहने लगती थी!

    स्रोत :
    • पुस्तक : आवाज़ में झर कर (पृष्ठ 12)
    • रचनाकार : प्रकाश
    • प्रकाशन : राजकमल प्रकाशन
    • संस्करण : 2018

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