पुराने दोस्त

शैलेंद्र साहू

पुराने दोस्त

शैलेंद्र साहू

और अधिकशैलेंद्र साहू

    हम पुराने दोस्त थे

    ‘थे’ पर इतना ज़ोर था

    कि आमने-सामने बैठकर भी

    हम अतीत थे

    भविष्य में

    एक गेंदे का फूल है

    एक हँसती हुई बेवक़ूफ लड़की

    (जो कमसिन है,

    हम बूढ़े हो चुके)

    इतने बरसों में

    हम इतनी बातें कर चुके थे

    कि उन बातों के धागे से

    पूरी दुनिया को पूरा

    तीन बार लपेटा जा सकता था

    और ख़ामोशी ही वह ख़ज़ाना था

    जिसे पाने के लिए

    हमने अपने पिताओं का क़त्ल किया

    फिर भी इसे उम्मीद ही कहिए

    कि अब हम अपनी अजन्मी बेटियों का

    सपना देखते हुए

    अपने-अपने घर लौटना चाहते हैं

    जबकि ‘लौटना’ कब का बेमानी हो चुका

    ‘विदाई’ और ‘जुदाई’ दो अलग-अलग शब्द हैं

    और सच तो यह है

    कि अब किसी भी बात के कोई मानी नहीं

    इसलिए हम बिना कुछ कहे

    उठे

    और

    मुड़

    गए

    स्रोत :
    • रचनाकार : शैलेंद्र साहू
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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