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कोना करनवां शहर भागे

kona karanvan shahr bhage

अज्ञात

अज्ञात

कोना करनवां शहर भागे

अज्ञात

और अधिकअज्ञात

    कोना करनवां शहर भागे

    पिया पपीहा के बोलिया जहर लागे...

    गरजे बदरिया चमके बिजुरिया,

    रही झकझोरेली पुरबी बयरिया

    छोटकी पलनियां जे टप-टप चुयेले

    सूनी-सूनी सेजिया बंजर लागे...

    पिया पपीहा के बोलिया जहर लागे

    आईल अगहनवां, सिकुडल बदनवां

    तोहरे फिकिरिया में तड़पे परनवाँ

    भरल जिनिगिया में अगिया लगवल

    रतियो कटे राम जहर लागे...

    पिया पपिहा के बोलिया जहर, लहर लागे...

    चढ़ते फगुनवा सगुनवा करवलीं

    छोटका देवरवा के खूब समझवलीं

    जायके शहरिया खबरिया तू कहिह

    जिनगी के नईया भँवर लागे

    पिया पपीहा के बोलिया जहर...

    स्रोत :
    • पुस्तक : भोजपुरी के रसगर गीत (पृष्ठ 23)
    • संपादक : तुलसीदास
    • प्रकाशन : लोक साहित्य संगम, बिहिया, भोजपुर, बिहार

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