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बेला

साहित्य और संस्कृति की घड़ी

रागदर्पण : कंधे आख़िर किसलिए होते हैं

 

उसका संग छूटते ही मेरे चौखूँट एक अजब निस्संगता आकर बैठ जाती थी कि फिर कई घंटों तक किसी की भी मौजूदगी मुझे उकताऊ और नागवार लगती। उसके साथ कोई आशनाई न थी; मगर हो सकने का भारी इमकान था, अगर मैं अपनी सन्न

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29 जुलाई 2026

आज का रचनाकार

रचनाकार का समय और समय का रचनाकार

प्रदीप सैनी

सुपरिचित कवि। 'दुनिया के होने की आवाज़' शीर्षक से एक कविता-संग्रह प्रकाशित।

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