आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "pelo sukh nirogi kaya ebooks"
अत्यधिक संबंधित परिणाम "pelo sukh nirogi kaya ebooks"
तें नर सुख कीये घने
तें नर सुख कीये घने, दुख भोगये अनंत।अब सुख दुख कौ पिठी दें, सुन्दर भजि भगवंत॥
सुंदरदास
अवधी लोकगीत : चलत प्रान काया काहे रोई
चलत प्रान काया काहे रोई।।टेक।।अब तक सुख कीन हम तुम माँ, मलि-मलि काया धोई।
पृष्ठ के संबंधित परिणाम "pelo sukh nirogi kaya ebooks"
अन्य परिणाम "pelo sukh nirogi kaya ebooks"
जतन बहुत सुख के किये
जतन बहुत सुख के किये, दुख को कियो न कोइ।कहु नानक सुन रे मना, हरि भावे सो होइ॥
गुरु तेग़ बहादुर
पति के सुख सुख मानती
पति के सुख सुख मानती, पति दुख देखि दुखाति।रतनावलि धनि द्वैत तजि, तिय पिय रूप लखाति॥
रत्नावली
सुख में संग मिलि सुख करै
सुख में संग मिलि सुख करै, दुख में पाछो होय।निज स्वारथ की मित्रता, मित्र अधम है सोय॥
गिरिधारन
दोउ सुख झाँकै झरोषनि
दोउ सुख झाँकै झरोषनि अलियाँ।सैन किलोलत लोल रसिक मन मैन बढ़यो ज्यों रैन सुघुलियाँ॥
कृपानिवास
‘तुलसी’ काया खेत है
‘तुलसी’ काया खेत है, मनसा भयौ किसान।पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥
तुलसीदास
जो सुख लेत सदा ब्रजवासी
जो सुख लेत सदा ब्रजवासी।सो सुख सपनेहुँ नहिं पावत, जे जन हैं बैकुंठ-निवासी॥
नागरीदास
झूठी काया माया के भरोसे भरमाया लाया
झूठी काया माया के भरोसे भरमाया लाया,माया हूँ गमाया पर मूरख पौमाया है।