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वाल्मीकि के उद्धरण

अराजक देश में आत्मा से आत्मा का ध्यान करने वाले, अकेले विचरने वाले, जहाँ साँझ हो वहीं बसेरा करने वाले मुनि कुशल से नहीं रह पाते।