मथुरा के रचनाकार
कुल: 23
जीव गोस्वामी
- जन्म : पश्चिम बंगाल
- निधन : वृंदावन
गौड़ीय वैष्णव संप्रदाय के प्रमुख संत और दार्शनिक। 'हरिनामामृतव्याकरणम्', 'गोपालचम्पू', 'धातुसूत्रमालिका', 'माधवमहोत्सवः' आदि कृतियों के लिए उल्लेखनीय।
हरिदास वैद्य
द्विवेदीयुगीन वैद्य, लेखक और अनुवादक। ‘चिकित्सा चंद्रोदय’ कृति के लिए उल्लेखनीय।
रूप गोस्वामी
गौड़ीय वैष्णव परंपरा के प्रमुख आचार्य, संत, भक्त, कवि और दार्शनिक।
ए० सी० प्रभुपाद
गौड़ीय वैष्णव गुरु और धार्मिक आचार्य। 'इस्कॉन' आंदोलन की स्थापना और वैश्विक प्रचार के लिए उल्लेखनीय।
चाचा हितवृंदावनदास
'राधावल्लभ संप्रदाय' से संबंधित। भाव-वैचित्र्य और काव्य-प्रौढ़ता के लिए विख्यात।
चतुर्भुजदास
कृष्णभक्त कवि। पुष्टिमार्गीय वल्लभ संप्रदाय के अष्टछाप कवियों में से एक। कुंभनदास के पुत्र और गोस्वामी विट्ठलनाथ के शिष्य।
ललितकिशोरी
वास्तविक नाम कुंदनलाल। सखी संप्रदाय में दीक्षित होकर ललित किशोरी नाम रखा। कृष्ण-भक्ति से ओत-प्रोत सरस पदों के लिए स्मरणीय।
नारायण स्वामी
कृष्ण-भक्ति के संत कवि। सुकोमल भाषा और विलक्षण भाव-वर्णन के लिए स्मरणीय।
बिहारिनिदेव
रसिक और संगीत प्रेमी भक्त कवि। 'हरिदासी संप्रदाय' से संबद्ध।
गुणमंजरीदास
रीतिकाल और आधुनिककाल के संधि कवि। कृष्ण-भक्ति के पद पुरानी परिपाटी में लिखे। पदों में रूपक और उपमाओं की सुंदर प्रयोग।
- निधन : वृंदावन
सोलहवीं सदी के भक्त कवि। श्रीभट्ट के शिष्य। 'निंबार्क संप्रदाय' से संबद्ध। 'ब्रजभाषा में रचित ग्रंथ 'महावाणी' के लिए स्मरणीय।
कवि कर्णपूर
ललितमोहिनी देव
'टट्टी संप्रदाय' के अष्टाचार्यों में से अंतिम। रसरीति के कुशल व्याख्याता एवं वैराग्य के धनी।