कौन पढ़ता है कविताएँ

kaun paDhta hai kawitayen

महेश आलोक

महेश आलोक

कौन पढ़ता है कविताएँ

महेश आलोक

और अधिकमहेश आलोक

     

    एक

    वह मछली जिसके पेट में राजा की अँगूठी है
    और वह ज़िंदा है हज़ारों साल से कविता में 
    चलो उससे पूछें
    कालिदास की कविता के बारे में

    शायद वह कंबल जो बरस रहा है
    और भिंगो रहा है पानी को बरसों से
    चलो उससे पूछें
    कबीर की कविता के बारे में

    मधुमक्खियाँ ज़रूर पढ़ती होंगी कविताएँ
    वे तो कविता की पैदाइश के साथ ही घोल रही हैं मिठास
    चलो उनसे पूछें
    इस कठिन समय में
    कितने दिन और जीवित रहेंगे सूरदास

    बादल, चिड़िया, सूरज और चंद्रमा इत्यादि
    जो कच्चे-पके फल की तरह लटक रहे हैं कविता में
    और मज़े लेते हैं हर कविता समय में
    ज़रूर पढ़ते होंगे कविताएँ
    आख़िर अपनी दशा-दुर्दशा पर टिप्पणी
    करने का अधिकार उन्हें भी है
    पूछें तुलसी और निराला के यहाँ उनका स्वाद
    अगले हज़ार सालों तक वही रहेगा
    जो आज है

    और सचमुच
    कितने किलोमीटर की दूरी पर है
    अज्ञेय और मुक्तिबोध का घर

    दो

    रिक्शेवाले और दूधवाले नहीं पढ़ते कविताएँ
    जैसे मछली पर लिखी कविताएँ मछली नहीं पढ़ती
    मछुआरे कविताएँ पढ़कर नहीं मारते मछलियाँ

    मुझे शक है शिक्षक भी पढ़ते हैं कविताएँ
    अपने जन्म से बीस साल पहले पैदा हुए कवि को 
    पाठ्य-पुस्तक के सिवा कहाँ देखा है उन्होंने

    कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री क्यों पढ़ेगा कविताएँ
    ग़लती से भी भेंट नहीं की किसी ने कोई कविता-पुस्तक
    किसी राष्ट्राध्यक्ष को आज तक

    हालाँकि यह भी सच है
    एक अच्छी कविता ज़्यादा ताक़तवर है
    किसी बहुमत वाली
    सरकार से

    स्रोत :
    • रचनाकार : महेश आलोक
    • प्रकाशन : हिन्दवी के लिए लेखक द्वारा चयनित

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