मैथिली लोकगीत : धान धान धान त भइया कोठी धान

maithili lokgit ha dhan dhan dhan t bhaiya kothi dhan

रोचक तथ्य

संदर्भ—बहिन की कामना।

धान धान धान भइया कोठी धान,

चुंगला कोठी भूसा।।1।।

आरे बृन्दाबन जारे बृन्दावन भइया मुख पान,

चुंगला मुख कोइला।।2।।

मटर मटर मटर भइया कोठी मटर,

चुंगला कोठी फटर।।3।।

चाउर चाउर भइया कोठी चाउर,

चुंगला कोठी छाउर।।4।।

बहिन कामना करती है—

भैया की कोठी में धान हो और चुंगला की कोठी में भूसा।।1।।

वृंदावन जाते समय भैया के मुख पान हो और चुंगला के मुँह में कोयला।।2।।

भैया की कोठी में मटर हो और चुंगला की कोठी में चूहों के चलने मात्र से फटर की आवाज़ हो।।3।।

स्रोत :
  • पुस्तक : हिंदी के लोकगीत (पृष्ठ 41)
  • संपादक : महेशप्रताप नारायण अवस्थी
  • प्रकाशन : सत्यवती प्रज्ञालोक
  • संस्करण : 2002

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